नवजात शिशु की देखभाल – Care Of New Born

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Smiling young doctor holding a beautiful newborn baby.

नवजात शिशु की देखभाल शिशु के जन्म के साथ ही शुरू हो जाती है। नए जन्मे बच्चे को बड़ी नाजुकता के साथ संभालना पड़ता है। बच्चे के
जन्म के बाद बच्चे को माँ का दूध सही तरीके से और पर्याप्त मात्रा में कैसे मिले , उसके पहनने के कपडे कैसे हो , उसका बार बार रोना , बार
बार नेपी गन्दा करना आदि बातों ध्यान रखना जरुरी होता है। इन बातों का अनुभव नहीं होने पर बहुत परेशानी हो सकती है। आइये देखें नवजात शिशु की देखभाल कैसे करनी चाहिए।

नवजात शिशु के आने से परिवार में ख़ुशी का माहौल बन जाता है। परिवार में नए सदस्य का हर्षोल्लास से स्वागत होता है। बच्चे के जन्म के साथ ही माता पिता का भी एक नया जन्म होता है। शिशु की देखभाल करके उसे स्वस्थ रखने की नई जिम्मेदारी माता पिता पर आ जाती है।

संयुक्त परिवार में दादी , नानी के अनुभव से शिशु की देखभाल बड़ी आसानी के साथ हो जाती है। उन्हें बच्चों के लिए घरेलु नुस्खों की अच्छी जानकारी होती है । परिवार के सभी सदस्य मिल जुलकर बच्चे की देखभाल कर लेते है। बच्चा कब बड़ा हो जाता है नए माता पिता को पता

ही नहीं चलता। लेकिन एकल परिवार में नए नए बने माता पिता को बच्चे की देखभाल का बिल्कुल अनुभव नहीं होता।
जानिए नवजात शिशु की देखभाल सम्बन्धी महवपूर्ण बातें और अच्छे माता पिता होने का कर्त्तव्य निभाएं।

नवजात शिशु की देखभाल करने का तरीका

नवजात शिशु की देखभाल का सबसे पहला और जरुरी हिस्सा है कि उसे जन्म के तुरंत बाद बच्चों के डॉक्टर ( Pediatrician ) को दिखा कर निश्चित कर लेना चाहिए कि बच्चा बिल्कुल ठीक है। विशेष कर जब बच्चा पेशाब ना करे , बच्चा बिल्कुल ना रोये , बच्चा बहुत अधिक वजन का हो , या बहुत कम वजन हो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके उसे सूचित करना चाहिए। बच्चे की स्किन पीली दिखाई दे तो पीलिया होने की सम्भावना होती है। ऐसे में बच्चे को डॉक्टर की सलाह से हल्की धूप दिखाएँ।

जन्म लेने के बाद उसे माँ के दूध की जरुरत होती है । इसी से उसकी दुनिया से जुड़ाव की पहली शुरुआत होती है। नए जन्म लिए बच्चे को माँ के स्तन से दूध पीना नहीं आता। उसे थोड़ा सिखाना पड़ता है। धीरज रखते हुए प्रयास करने से बच्चा दूध पीना सीख जाता है। माँ को स्तन से निकलने वाला पहला गाढ़ा और पीला दूध शिशु को जरूर पिलाना चाहिए। इस पहले दूध को कोलेस्ट्रम कहते है। इससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक शक्ति का जबरदस्त विकास होता है। जिससे बच्चा स्वस्थ रहता है।

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